श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 18: महादेवजीके कोपसे देवता, यज्ञ और जगत‍्की दुरवस्था तथा उनके प्रसादसे सबका स्वस्थ होना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  10.18.3 
ता वै रुद्रमजानन्त्यो याथातथ्येन देवता:।
नाकल्पयन्त देवस्य स्थाणोर्भागं नराधिप॥ ३॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! उस समय देवतागण भगवान रुद्र को वास्तव में नहीं जानते थे; इसीलिए उन्होंने 'स्थाणु' नामक भगवान शिव की भूमिका की कल्पना नहीं की थी॥3॥
 
Nareshwar! At that time the gods did not actually know Lord Rudra; That is why he did not imagine the role of Lord Shiva named 'Sthanu'. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)