श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 18: महादेवजीके कोपसे देवता, यज्ञ और जगत‍्की दुरवस्था तथा उनके प्रसादसे सबका स्वस्थ होना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  10.18.26 
न तन्मनसि कर्तव्यं न च तद् द्रौणिना कृतम्।
महादेवप्रसादेन कुरु कार्यमनन्तरम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
इसलिए इस बात को दिल पर मत लो। अश्वत्थामा ने यह कार्य अपने बल से नहीं, बल्कि महादेवजी की कृपा से पूरा किया है। अब आगे जो करना हो, तुम करो।
 
Therefore, do not take this matter to heart. Ashwatthama has accomplished this task not by his own strength but by the grace of Mahadevji. Now you do whatever you want to do next.
 
इति श्रीमहाभारते सौप्तिकपर्वणि ऐषीकपर्वणि अष्टादशोऽध्याय:॥ १८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सौप्तिकपर्वके अन्तर्गत ऐषीकपर्वमें अठारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८॥

॥ सौप्तिकपर्व सम्पूर्णम्॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)