श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 18: महादेवजीके कोपसे देवता, यज्ञ और जगत‍्की दुरवस्था तथा उनके प्रसादसे सबका स्वस्थ होना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  10.18.22 
भगस्य नयने चैव बाहू च सवितुस्तथा।
प्रादात् पूष्णश्च दशनान् पुनर्यज्ञांश्च पाण्डव॥ २२॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन! तब भगवान शिव ने भग को नेत्र, सविता को दोनों भुजाएँ, पूषा को दाँत और देवताओं को यज्ञ प्रदान किए॥22॥
 
Pandunandan! Then Lord Shiva provided eyes to Bhaga, both arms to Savita, teeth to Pusha and Yagya to the gods. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)