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mahabharat 10.18.12: इससे व्याकुल होकर देवतागण किसी भी वस्तु को पहचान नहीं पा रहे थे, यहाँ तक कि यज्ञ भी ठीक से नहीं हो रहा था। इससे समस्त देवता भय से काँप रहे थे॥12॥   |   mahabharat अध्याय 10.18: महादेवजीके कोपसे देवता, यज्ञ और जगत‍्की दुरवस्था तथा उनके प्रसादसे सबका स्वस्थ होना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 18: महादेवजीके कोपसे देवता, यज्ञ और जगत‍्की दुरवस्था तथा उनके प्रसादसे सबका स्वस्थ होना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  10.18.12 
अभिभूतास्ततो देवा विषयान्न प्रजज्ञिरे।
न प्रत्यभाच्च यज्ञ: स देवतास्त्रेसिरे तथा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
इससे व्याकुल होकर देवतागण किसी भी वस्तु को पहचान नहीं पा रहे थे, यहाँ तक कि यज्ञ भी ठीक से नहीं हो रहा था। इससे समस्त देवता भय से काँप रहे थे॥12॥
 
Overwhelmed by it, the gods were unable to recognize any object, even the yajna was not performed properly. Due to this all the gods trembled with fear.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)