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श्री महाभारत
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पर्व 10: सौप्तिक पर्व
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अध्याय 18: महादेवजीके कोपसे देवता, यज्ञ और जगत्की दुरवस्था तथा उनके प्रसादसे सबका स्वस्थ होना
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श्लोक 11
श्लोक
10.18.11
न बभौ भास्करश्चापि सोम: श्रीमुक्तमण्डल:।
तिमिरेणाकुलं सर्वमाकाशं चाभवद् वृतम्॥ ११॥
अनुवाद
सूर्य पूरी तरह से चमक नहीं रहा था, चंद्रमा भी अपनी चमक खो चुका था और सारा आकाश अंधकार से व्याप्त था ॥11॥
The sun was not shining fully, the moon had also lost its glory and the entire sky was pervaded by darkness. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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