श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 18: महादेवजीके कोपसे देवता, यज्ञ और जगत‍्की दुरवस्था तथा उनके प्रसादसे सबका स्वस्थ होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  10.18.1 
श्रीभगवानुवाच
ततो देवयुगेऽतीते देवा वै समकल्पयन्।
यज्ञं वेदप्रमाणेन विधिवद् यष्टुमीप्सव:॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले - तत्पश्चात सत्ययुग व्यतीत हो जाने पर देवताओं ने भगवान के यज्ञ को विधिपूर्वक करने की इच्छा से वैदिक प्रमाणों के अनुसार यज्ञ की कल्पना की।
 
Shri Bhagwan said - After that, after Satyayuga passed, the gods conceived the Yagya according to the Vedic evidence with the desire to perform the Yagya of the Lord in a proper manner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)