Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.16.9-11: परन्तु सभी विद्वान तुम्हें कायर, पापी, बार-बार अपराध करने वाला और बाल-हत्यारा मानते हैं। अतः तुम्हें इस पाप कर्म का फल भोगना चाहिए। आज से तुम तीन हज़ार वर्षों तक इस पृथ्वी पर भटकते रहोगे। तुम्हें कहीं भी किसी से बात करने का सुख नहीं मिलेगा। तुम निर्जन स्थानों में अकेले घूमते रहोगे। | mahabharat अध्याय 10.16: श्रीकृष्णसे शाप पाकर अश्वत्थामाका वनको प्रस्थान तथा पाण्डवोंका मणि देकर द्रौपदीको शान्त करना । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परन्तु सभी विद्वान तुम्हें कायर, पापी, बार-बार अपराध करने वाला और बाल-हत्यारा मानते हैं। अतः तुम्हें इस पाप कर्म का फल भोगना चाहिए। आज से तुम तीन हज़ार वर्षों तक इस पृथ्वी पर भटकते रहोगे। तुम्हें कहीं भी किसी से बात करने का सुख नहीं मिलेगा। तुम निर्जन स्थानों में अकेले घूमते रहोगे।
But all the wise men consider you a coward, a sinner, a repeat offender and a child killer. Therefore, you should bear the consequences of this sinful act. From today onwards, you will wander on this earth for three thousand years. You will never get the pleasure of talking to anyone anywhere. You will keep roaming alone in deserted places.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥