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mahabharat 10.16.6: कमलनेत्र केशव! इस समय तुमने पाण्डवों के प्रति पक्षपातपूर्ण जो कुछ कहा है, वह कभी नहीं हो सकता। मेरे वचन मिथ्या नहीं होंगे॥6॥   |   mahabharat अध्याय 10.16: श्रीकृष्णसे शाप पाकर अश्वत्थामाका वनको प्रस्थान तथा पाण्डवोंका मणि देकर द्रौपदीको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  10.16.6 
नैतदेवं यथाऽऽत्थ त्वं पक्षपातेन केशव।
वचनं पुण्डरीकाक्ष न च मद्वाक्यमन्यथा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
कमलनेत्र केशव! इस समय तुमने पाण्डवों के प्रति पक्षपातपूर्ण जो कुछ कहा है, वह कभी नहीं हो सकता। मेरे वचन मिथ्या नहीं होंगे॥6॥
 
'Lotus-eyed Keshav! What you have said at this time, showing partiality towards the Pandavas, can never happen. My words will not be false.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)