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mahabharat 10.16.5: जब सात्वत कुल के प्रधान भगवान श्रीकृष्ण ऐसा कह रहे थे, तब द्रोणपुत्र अश्वत्थामा अत्यंत क्रोधित हो गया और उसे उत्तर देते हुए बोला-॥5॥   |   mahabharat अध्याय 10.16: श्रीकृष्णसे शाप पाकर अश्वत्थामाका वनको प्रस्थान तथा पाण्डवोंका मणि देकर द्रौपदीको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  10.16.5 
एवं ब्रुवाणं गोविन्दं सात्वतां प्रवरं तदा।
द्रौणि: परमसंरब्ध: प्रत्युवाचेदमुत्तरम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जब सात्वत कुल के प्रधान भगवान श्रीकृष्ण ऐसा कह रहे थे, तब द्रोणपुत्र अश्वत्थामा अत्यंत क्रोधित हो गया और उसे उत्तर देते हुए बोला-॥5॥
 
When Lord Krishna, the head of the Satvat clan, was saying this, Drona's son Ashwatthama became extremely angry and while answering him said -॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)