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mahabharat 10.16.33: देवी! उसका सारा वैभव धूल में मिल गया है। केवल उसका शरीर ही बचा है। उसकी मणि भी छीन ली गई है और वह पृथ्वी पर हथियार फेंकने को विवश हो गया है।'   |   mahabharat अध्याय 10.16: श्रीकृष्णसे शाप पाकर अश्वत्थामाका वनको प्रस्थान तथा पाण्डवोंका मणि देकर द्रौपदीको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 16: श्रीकृष्णसे शाप पाकर अश्वत्थामाका वनको प्रस्थान तथा पाण्डवोंका मणि देकर द्रौपदीको शान्त करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  10.16.33 
यशोऽस्य पतितं देवि शरीरं त्ववशेषितम्।
वियोजितश्च मणिना भ्रंशितश्चायुधं भुवि॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
देवी! उसका सारा वैभव धूल में मिल गया है। केवल उसका शरीर ही बचा है। उसकी मणि भी छीन ली गई है और वह पृथ्वी पर हथियार फेंकने को विवश हो गया है।'
 
‘Goddess! All his glory has been reduced to dust. Only his body is left. Even his gem has been snatched away and he has been forced to throw weapons on the earth.’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)