Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 10.16.21-22: इधर, शत्रुओं के मारे जाने पर पाण्डव भी भगवान श्रीकृष्ण, श्री कृष्णद्वैपायन व्यास और महामुनि नारदजी को साथ लेकर शीघ्रतापूर्वक चले और मनस्विनी द्रौपदी के पास पहुँचे, जो द्रोणपुत्र के साथ उत्पन्न हुई मणि को लेकर आमरण अनशन पर बैठी हुई थी॥ 21-22॥   |   mahabharat अध्याय 10.16: श्रीकृष्णसे शाप पाकर अश्वत्थामाका वनको प्रस्थान तथा पाण्डवोंका मणि देकर द्रौपदीको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 16: श्रीकृष्णसे शाप पाकर अश्वत्थामाका वनको प्रस्थान तथा पाण्डवोंका मणि देकर द्रौपदीको शान्त करना  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  10.16.21-22 
पाण्डवाश्चापि गोविन्दं पुरस्कृत्य हतद्विष:।
कृष्णद्वैपायनं चैव नारदं च महामुनिम्॥ २१॥
द्रोणपुत्रस्य सहजं मणिमादाय सत्वरा:।
द्रौपदीमभ्यधावन्त प्रायोपेतां मनस्विनीम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इधर, शत्रुओं के मारे जाने पर पाण्डव भी भगवान श्रीकृष्ण, श्री कृष्णद्वैपायन व्यास और महामुनि नारदजी को साथ लेकर शीघ्रतापूर्वक चले और मनस्विनी द्रौपदी के पास पहुँचे, जो द्रोणपुत्र के साथ उत्पन्न हुई मणि को लेकर आमरण अनशन पर बैठी हुई थी॥ 21-22॥
 
Here, the Pandavas, whose enemies were killed, also moved quickly, carrying Lord Krishna, Shri Krishnadvaipayana Vyas and the great sage Naradji, to reach Manaswini Draupadi, who was sitting on a fast unto death, carrying the gem that was born along with Drona's son. 21-22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)