Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.16.17-18: व्यास बोले, "द्रोणपुत्र! तुमने हमारा अनादर करके घोर पाप किया है। ब्राह्मण होकर भी तुम्हारा आचरण इतना गिर गया है और तुमने क्षत्रिय धर्म अपना लिया है। अतः देवकीनन्दन श्रीकृष्ण ने जो भी उत्तम उपदेश दिया है, वह अवश्य ही तुम्हारे साथ घटित होगा, इसमें संशय नहीं है।" | mahabharat अध्याय 10.16: श्रीकृष्णसे शाप पाकर अश्वत्थामाका वनको प्रस्थान तथा पाण्डवोंका मणि देकर द्रौपदीको शान्त करना । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
व्यास उवाच
यस्मादनादृत्य कृतं त्वयास्मान् कर्म दारुणम्।
ब्राह्मणस्य सतश्चैव यस्मात् ते वृत्तमीदृशम्॥ १७॥
तस्माद् यद् देवकीपुत्र उक्तवानुत्तमं वच:।
असंशयं ते तद् भावि क्षत्रधर्मस्त्वयाऽऽश्रित:॥ १८॥
अनुवाद
व्यास बोले, "द्रोणपुत्र! तुमने हमारा अनादर करके घोर पाप किया है। ब्राह्मण होकर भी तुम्हारा आचरण इतना गिर गया है और तुमने क्षत्रिय धर्म अपना लिया है। अतः देवकीनन्दन श्रीकृष्ण ने जो भी उत्तम उपदेश दिया है, वह अवश्य ही तुम्हारे साथ घटित होगा, इसमें संशय नहीं है।"
Vyasa said, "Drona's son! You have committed a terrible deed by disrespecting us. Despite being a Brahmin, your conduct has fallen so low and you have adopted the religion of a Kshatriya. Therefore, whatever good advice Devakinandan Sri Krishna has given will definitely happen to you, there is no doubt about it."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥