श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 15: वेदव्यासजीकी आज्ञासे अर्जुनके द्वारा अपने अस्त्रका उपसंहार तथा अश्वत्थामाका अपनी मणि देकर पाण्डवोंके गर्भोंपर दिव्यास्त्र छोड़ना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  10.15.4 
यदत्र हितमस्माकं लोकानां चैव सर्वथा।
भवन्तौ देवसंकाशौ तथा सम्मन्तुमर्हत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
आप दोनों ही देवता के समान हैं; अतः कृपया हमें यह सलाह दीजिए कि इस समय हमारे और सब लोगों के लिए क्या हितकर होगा।’ ॥4॥
 
'Both of you are like gods; therefore, please advise us as to what would be beneficial to us and everyone else at this time.' ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)