Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 10.15.30: इसमें राक्षसों और चोरों का कोई भय नहीं है। मेरे इस मणि का ऐसा अद्भुत प्रभाव है। इसलिए मुझे इसे किसी भी हालत में नहीं छोड़ना चाहिए ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 10.15: वेदव्यासजीकी आज्ञासे अर्जुनके द्वारा अपने अस्त्रका उपसंहार तथा अश्वत्थामाका अपनी मणि देकर पाण्डवोंके गर्भोंपर दिव्यास्त्र छोड़ना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 15: वेदव्यासजीकी आज्ञासे अर्जुनके द्वारा अपने अस्त्रका उपसंहार तथा अश्वत्थामाका अपनी मणि देकर पाण्डवोंके गर्भोंपर दिव्यास्त्र छोड़ना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  10.15.30 
न च रक्षोगणभयं न तस्करभयं तथा।
एवंवीर्यो मणिरयं न मे त्याज्य: कथंचन॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
इसमें राक्षसों और चोरों का कोई भय नहीं है। मेरे इस मणि का ऐसा अद्भुत प्रभाव है। इसलिए मुझे इसे किसी भी हालत में नहीं छोड़ना चाहिए ॥30॥
 
There is no fear of demons or thieves. This gem of mine has such a wonderful effect. Therefore, I should not abandon it under any circumstances. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)