श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 15: वेदव्यासजीकी आज्ञासे अर्जुनके द्वारा अपने अस्त्रका उपसंहार तथा अश्वत्थामाका अपनी मणि देकर पाण्डवोंके गर्भोंपर दिव्यास्त्र छोड़ना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  10.15.27 
मणिं चैव प्रयच्छाद्य यस्ते शिरसि तिष्ठति।
एतदादाय ते प्राणान् प्रतिदास्यन्ति पाण्डवा:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
आज अपने मस्तक की मणि उन्हें दे दो। इस मणि के बदले में पाण्डव तुम्हारे प्राण छोड़ देंगे॥ 27॥
 
Give them the gem on your head today. In return for this gem, the Pandavas will spare your life.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)