श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 15: वेदव्यासजीकी आज्ञासे अर्जुनके द्वारा अपने अस्त्रका उपसंहार तथा अश्वत्थामाका अपनी मणि देकर पाण्डवोंके गर्भोंपर दिव्यास्त्र छोड़ना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  10.15.20 
अस्त्रमस्त्रेण तु रणे तव संशमयिष्यता।
विसृष्टमर्जुनेनेदं पुनश्च प्रतिसंहृतम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
देखो, अर्जुन ने युद्धभूमि में आपके अस्त्र का प्रयोग केवल अपने अस्त्र से उसे निष्फल करने के उद्देश्य से किया था और अब उसने उसे पुनः वापस ले लिया है ॥20॥
 
See, Arjuna used your weapon on the battlefield with the sole purpose of neutralizing it with his own weapon and now he has taken it back again. ॥20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)