श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 15: वेदव्यासजीकी आज्ञासे अर्जुनके द्वारा अपने अस्त्रका उपसंहार तथा अश्वत्थामाका अपनी मणि देकर पाण्डवोंके गर्भोंपर दिव्यास्त्र छोड़ना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  10.15.17 
तदिदं पाण्डवेयानामन्तकायाभिसंहितम्।
अद्य पाण्डुसुतान् सर्वान् जीविताद् भ्रंशयिष्यति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों के विनाश के इरादे से छोड़ा गया यह दिव्य अस्त्र आज पाण्डु के समस्त पुत्रों के प्राण ले लेगा।
 
'This divine weapon released with the intention of destruction of the Pandavas will today take the life of all the sons of Pandu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)