विसृष्टं हि मया दिव्यमेतदस्त्रं दुरासदम्।
अपाण्डवायेति मुने वह्नितेजोऽनुमन्त्र्य वै॥ १६॥
अनुवाद
मुने ! मैंने अग्नि के समान तेज से युक्त इस दुर्जय दिव्यास्त्र को पाण्डवों का नामोनिशान मिटा देने के उद्देश्य से ही छोड़ा था ॥16॥
'Mune! I had released this formidable divine weapon, imbued with the brilliance of fire, with the sole purpose of destroying all traces of the Pandavas. 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥