श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 15: वेदव्यासजीकी आज्ञासे अर्जुनके द्वारा अपने अस्त्रका उपसंहार तथा अश्वत्थामाका अपनी मणि देकर पाण्डवोंके गर्भोंपर दिव्यास्त्र छोड़ना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  10.15.11 
द्रौणिरप्यथ सम्प्रेक्ष्य तावृषी पुरत: स्थितौ।
न शशाक पुनर्घोरमस्त्रं संहर्तुमोजसा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब अश्वत्थामा ने उन ऋषियों को अपने सामने खड़ा देखा, तब उसने बलपूर्वक उस भयंकर अस्त्र को वापस लेना चाहा, परन्तु वह ऐसा करने में सफल न हुआ ॥11॥
 
When Ashvatthama saw those sages standing before him, he tried to take back that terrible weapon by force, but he was not successful in doing so. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)