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mahabharat 10.14.3: भरतनंदन! अपने भाइयों और अपनी रक्षा के लिए तुम भी युद्ध में इस ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करो। अश्वत्थामा के अस्त्र का निवारण इसी से हो सकता है। 3॥   |   mahabharat अध्याय 10.14: अश्वत्थामाके अस्त्रका निवारण करनेके लिये अर्जुनके द्वारा ब्रह्मास्त्रका प्रयोग एवं वेदव्यासजी और देवर्षि नारदका प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 14: अश्वत्थामाके अस्त्रका निवारण करनेके लिये अर्जुनके द्वारा ब्रह्मास्त्रका प्रयोग एवं वेदव्यासजी और देवर्षि नारदका प्रकट होना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  10.14.3 
भ्रातॄणामात्मनश्चैव परित्राणाय भारत।
विसृजैतत् त्वमप्याजावस्त्रमस्त्रनिवारणम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भरतनंदन! अपने भाइयों और अपनी रक्षा के लिए तुम भी युद्ध में इस ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करो। अश्वत्थामा के अस्त्र का निवारण इसी से हो सकता है। 3॥
 
'Bharatanandan! To protect your brothers and yourself, you too use this Brahmastra in the war. Ashwatthama's weapon can be resolved through this only. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)