श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 14: अश्वत्थामाके अस्त्रका निवारण करनेके लिये अर्जुनके द्वारा ब्रह्मास्त्रका प्रयोग एवं वेदव्यासजी और देवर्षि नारदका प्रकट होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  10.14.1 
वैशम्पायन उवाच
इङ्गितेनैव दाशार्हस्तमभिप्रायमादित:।
द्रौणेर्बुद्‍ध्वा महाबाहुरर्जुनं प्रत्यभाषत॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! दशार्हनन्दन महाबाहु भगवान श्रीकृष्ण के प्रयत्न से अश्वत्थामा का मन पहले ही टूट चुका था। उसने अर्जुन से कहा:
 
Vaishampayanji says- Rajan! Due to the efforts of Dasharhanandan, the mighty-armed Lord Shri Krishna, Ashwatthama had already broken his mind. He said to Arjun:
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)