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श्री महाभारत
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पर्व 10: सौप्तिक पर्व
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अध्याय 13: श्रीकृष्ण, अर्जुन और युधिष्ठिरका भीमसेनके पीछे जाना, भीमका गंगातटपर पहुँचकर अश्वत्थामाको ललकारना और अश्वत्थामाके द्वारा ब्रह्मास्त्रका प्रयोग
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श्लोक 19
श्लोक
10.13.19
स तद् दिव्यमदीनात्मा परमा स् त्रमचिन्तयत्।
जग्राह च स चैषीकां द्रौणि: सव्येन पाणिना॥ १९॥
अनुवाद
उदार हृदय वाले अश्वत्थामा ने उस दिव्य एवं उत्तम अस्त्र का चिंतन किया और साथ ही अपने बाएं हाथ से एक भाला उठा लिया।
The generous-hearted Ashvatthama contemplated over that divine and excellent weapon. At the same time he picked up a spear with his left hand.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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