इत्युक्तवान् गुरु: पुत्रं द्रोण: पश्चादथोक्तवान्।
न त्वं जातु सतां मार्गे स्थातेति पुरुषर्षभ॥ ९॥
अनुवाद
हे पुरुषोत्तम! अपने पुत्र से ऐसा कहकर गुरु द्रोण ने पुनः उससे कहा - 'पुत्र! मुझे संदेह है कि तू कभी भी सत्पुरुषों के मार्ग पर दृढ़ नहीं रह सकेगा।'॥9॥
'Best of men! Having said this to his son, Guru Drona again said to him - 'Son! I have a doubt that you will never remain steadfast on the path of good men.'॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥