Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.12.9: हे पुरुषोत्तम! अपने पुत्र से ऐसा कहकर गुरु द्रोण ने पुनः उससे कहा - 'पुत्र! मुझे संदेह है कि तू कभी भी सत्पुरुषों के मार्ग पर दृढ़ नहीं रह सकेगा।'॥9॥ | mahabharat अध्याय 10.12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इत्युक्तवान् गुरु: पुत्रं द्रोण: पश्चादथोक्तवान्।
न त्वं जातु सतां मार्गे स्थातेति पुरुषर्षभ॥ ९॥
अनुवाद
हे पुरुषोत्तम! अपने पुत्र से ऐसा कहकर गुरु द्रोण ने पुनः उससे कहा - 'पुत्र! मुझे संदेह है कि तू कभी भी सत्पुरुषों के मार्ग पर दृढ़ नहीं रह सकेगा।'॥9॥
'Best of men! Having said this to his son, Guru Drona again said to him - 'Son! I have a doubt that you will never remain steadfast on the path of good men.'॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥