श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  10.12.8 
परमापद्‍गतेनापि न स्म तात त्वया रणे।
इदमस्त्रं प्रयोक्तव्यं मानुषेषु विशेषत:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
"बेटा! यदि तुम बड़े से बड़े संकट में भी पड़ो, तो भी तुम्हें युद्धभूमि में, विशेषतः मनुष्यों पर, इस अस्त्र का प्रयोग नहीं करना चाहिए।" ॥8॥
 
"Son! Even if you are in the greatest danger, you should not use this weapon on the battlefield, especially on humans." ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)