श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  10.12.6 
तं पुत्रोऽप्येक एवैनमन्वयाचदमर्षण:।
तत: प्रोवाच पुत्राय नातिहृष्टमना इव॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अश्वत्थामा यह सहन नहीं कर सका। वह उनका इकलौता पुत्र था; इसलिए उसने भी अपने पिता से वही अस्त्र माँगने की प्रार्थना की। तब आचार्य ने उसके पुत्र को वह अस्त्र सिखाया; परन्तु वह उससे बहुत प्रसन्न नहीं हुआ।
 
‘Ashwatthama could not tolerate this. He was his only son; hence he also prayed to his father for the same weapon. Then the Acharya taught his son the weapon; but he was not very happy with it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)