श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  10.12.5 
तन्महात्मा महाभाग: केतु: सर्वधनुष्मताम्।
प्रत्यपादयदाचार्य: प्रीयमाणो धनंजयम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
सभी धनुर्धरों के नेता महात्मा द्रोणाचार्य ने प्रसन्न होकर सबसे पहले वह अस्त्र अर्जुन को दिया।
 
‘The great Mahatma Dronacharya, the leader of all archers, was pleased and first gave that weapon to Arjun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)