स संरम्भी दुरात्मा च चपल: क्रूर एव च।
वेद चास्त्रं ब्रह्मशिरस्तस्माद् रक्ष्यो वृकोदर:॥ ४१॥
अनुवाद
वह क्रोधी, दुष्ट, चंचल और क्रूर है। वह ब्रह्मास्त्र का भी ज्ञाता है; अतः उससे भीमसेन की रक्षा करनी चाहिए।॥41॥
'He is short-tempered, evil-spirited, fickle and cruel. He also has knowledge of the Brahmastra; therefore, Bhimasena must be protected from him.'॥ 41॥
इति श्रीमहाभारते सौप्तिकपर्वणि ऐषीकपर्वणि युधिष्ठिरकृष्णसंवादे द्वादशोऽध्याय:॥ १२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सौप्तिकपर्वके अन्तर्गत ऐषीकपर्वमें युधिष्ठिर और श्रीकृष्णका संवादविषयक बारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥