श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  10.12.41 
स संरम्भी दुरात्मा च चपल: क्रूर एव च।
वेद चास्त्रं ब्रह्मशिरस्तस्माद् रक्ष्यो वृकोदर:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
वह क्रोधी, दुष्ट, चंचल और क्रूर है। वह ब्रह्मास्त्र का भी ज्ञाता है; अतः उससे भीमसेन की रक्षा करनी चाहिए।॥41॥
 
'He is short-tempered, evil-spirited, fickle and cruel. He also has knowledge of the Brahmastra; therefore, Bhimasena must be protected from him.'॥ 41॥
 
इति श्रीमहाभारते सौप्तिकपर्वणि ऐषीकपर्वणि युधिष्ठिरकृष्णसंवादे द्वादशोऽध्याय:॥ १२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सौप्तिकपर्वके अन्तर्गत ऐषीकपर्वमें युधिष्ठिर और श्रीकृष्णका संवादविषयक बारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)