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mahabharat 10.12.40: इतना कहकर द्रोणपुत्र अश्वत्थामा घोड़े, धन और नाना प्रकार के रत्न लेकर समय आने पर वहाँ से लौट आया।   |   mahabharat अध्याय 10.12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  10.12.40 
एतावदुक्त्वा द्रौणिर्मां युग्यानश्वान् धनानि च।
आदायोपययौ काले रत्नानि विविधानि च॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
इतना कहकर द्रोणपुत्र अश्वत्थामा घोड़े, धन और नाना प्रकार के रत्न लेकर समय आने पर वहाँ से लौट आया।
 
Having said just this, Drona's son Ashwatthama took with him horses, wealth and precious stones of various kinds, and returned from there in due time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)