श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  10.12.39 
एतत् सुभीमं भीमानामृषभेण त्वया धृतम्।
चक्रमप्रतिचक्रेण भुवि नान्योऽभिपद्यते॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
यह चक्र अत्यंत भयंकर है और आप भयंकर योद्धाओं के नेता हैं। आपके किसी भी विरोधी के पास ऐसा चक्र नहीं है। आप ही इसे धारण करते हैं। इस पृथ्वी पर कोई अन्य व्यक्ति इसे उठा नहीं सकता।॥39॥
 
“This chakra is extremely fearsome and you are the leader of fearsome warriors. None of your opponents have such a chakra. You alone hold it. No other person on this earth can lift it.”॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)