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mahabharat 10.12.38: "किन्तु केशव! अब मैं अपनी यह दुर्लभ कामना आपसे पूर्ण कराए बिना ही लौट जाऊँगा। गोविन्द! आप मुझसे केवल इतना कहिए, 'आपका कल्याण हो'॥ 38॥   |   mahabharat अध्याय 10.12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  10.12.38 
त्वत्तोऽहं दुर्लभं काममनवाप्यैव केशव।
प्रतियास्यामि गोविन्द शिवेनाभिवदस्व माम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
"किन्तु केशव! अब मैं अपनी यह दुर्लभ कामना आपसे पूर्ण कराए बिना ही लौट जाऊँगा। गोविन्द! आप मुझसे केवल इतना कहिए, 'आपका कल्याण हो'॥ 38॥
 
“But Keshav! Now I will return without getting this rare wish of mine fulfilled from you. Govind! You just say this to me, ‘May you be blessed’.॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)