Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 10.12.35: "पिताजी! रथियों में श्रेष्ठ! आप भरतवंशी गुरु के पुत्र हैं। समस्त यादवों ने आपका बहुत आदर किया है। फिर बताइए, आप इस चक्र द्वारा किसके साथ युद्ध करना चाहते हैं?"॥35॥   |   mahabharat अध्याय 10.12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  10.12.35 
भारताचार्यपुत्रस्त्वं मानित: सर्वयादवै:।
चक्रेण रथिनां श्रेष्ठ कं नु तात युयुत्ससे॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
"पिताजी! रथियों में श्रेष्ठ! आप भरतवंशी गुरु के पुत्र हैं। समस्त यादवों ने आपका बहुत आदर किया है। फिर बताइए, आप इस चक्र द्वारा किसके साथ युद्ध करना चाहते हैं?"॥35॥
 
“Father! Best of charioteers! You are the son of the teacher of the Bharat clan. All the Yadavas have honoured you greatly. Then tell me, with whom do you wish to fight with this discus?”॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)