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mahabharat 10.12.34: “द्वारका में रहने वाले अन्य वृष्णि और अंधक वंश के योद्धाओं ने मुझसे कभी ऐसा प्रस्ताव नहीं किया जैसा तुमने इस चक्र को मांगकर किया है।   |   mahabharat अध्याय 10.12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  10.12.34 
द्वारकावासिभिश्चान्यैर्वृष्ण्यन्धकमहारथै:।
नोक्तपूर्वमिदं जातु यदिदं प्रार्थितं त्वया॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
“द्वारका में रहने वाले अन्य वृष्णि और अंधक वंश के योद्धाओं ने मुझसे कभी ऐसा प्रस्ताव नहीं किया जैसा तुमने इस चक्र को मांगकर किया है।
 
“The other Vrishni and Andhaka clan warriors residing in Dvaraka have never made a proposal to me as you have done by asking for this Chakra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)