श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  10.12.3 
भीम: प्रियस्ते सर्वेभ्यो भ्रातृभ्यो भरतर्षभ।
तं कृच्छ्रगतमद्य त्वं कस्मान्नाभ्युपपद्यसे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भरत के परम मित्र! भीमसेन तुम्हें अपने सभी भाइयों से अधिक प्रिय हैं; किन्तु आज वे संकट में हैं। फिर तुम उनकी सहायता करने क्यों नहीं जाते?
 
Bhaarat's best friend! Bhimasena is dearer to you than all your brothers; but today he is in trouble. Then why don't you go to help him?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)