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श्री महाभारत
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पर्व 10: सौप्तिक पर्व
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अध्याय 12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना
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श्लोक 25
श्लोक
10.12.25
निवृत्तमनसं तस्मादभिप्रायाद् विचेतसम्।
अहमामन्त्र्य संविग्नमश्वत्थामानमब्रुवम्॥ २५॥
अनुवाद
जब वह उस निश्चय पर अविचलित होकर शोक के कारण अचेत और व्याकुल हो गया, तब मैंने अश्वत्थामा को बुलाकर उससे पूछा-॥25॥
When he lost his mind on that resolve and became unconscious and disturbed due to grief, then I called Ashvatthama and asked him -॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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