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श्री महाभारत
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पर्व 10: सौप्तिक पर्व
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अध्याय 12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना
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श्लोक 21
श्लोक
10.12.21
गृहाण चक्रमित्युक्तो मया तु तदनन्तरम्।
जग्राहोत्पत्य सहसा चक्रं सव्येन पाणिना॥ २१॥
अनुवाद
मैंने भी कहा, ‘यह चक्र लो।’ मेरे यह कहते ही वह अचानक उछल पड़ा और उसने अपने बाएं हाथ से चक्र पकड़ लिया।
I also said, 'Take this Chakra.' As soon as I said this, he suddenly jumped up and caught the Chakra with his left hand.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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