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mahabharat 10.12.20: तब उस महापुरुष ने मुझसे स्पर्धा करते हुए मुझसे मेरा वह लोहे का चक्र माँगा, जिसकी सुन्दर नाभि में वज्र है और जो सहस्र बाणों से सुशोभित है!॥20॥   |   mahabharat अध्याय 10.12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  10.12.20 
स सुनाभं सहस्रारं वज्रनाभमयस्मयम्।
वव्रे चक्रं महाभागो मत्त: स्पर्धन्मया सह॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तब उस महापुरुष ने मुझसे स्पर्धा करते हुए मुझसे मेरा वह लोहे का चक्र माँगा, जिसकी सुन्दर नाभि में वज्र है और जो सहस्र बाणों से सुशोभित है!॥20॥
 
'Then that great man, competing with me, asked me for my iron discus, which has a thunderbolt in its beautiful navel and is adorned with a thousand arrows!॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)