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mahabharat 10.12.2: पाण्डुनन्दन! आपके भाई भीमसेन पुत्रशोक में मग्न होकर युद्ध में अकेले द्रोणकुमार को मार डालने की इच्छा से उन पर आक्रमण कर रहे हैं॥2॥   |   mahabharat अध्याय 10.12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  10.12.2 
एष पाण्डव ते भ्राता पुत्रशोकपरायण:।
जिघांसुर्द्रौणिमाक्रन्दे एक एवाभिधावति॥ २॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन! आपके भाई भीमसेन पुत्रशोक में मग्न होकर युद्ध में अकेले द्रोणकुमार को मार डालने की इच्छा से उन पर आक्रमण कर रहे हैं॥2॥
 
Pandunandan! Your brother Bhimsen, being engrossed in the grief of his son, is attacking Drona Kumar alone in the battle with the desire to kill him. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)