श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  10.12.18 
इदं धनुरियं शक्तिरिदं चक्रमियं गदा।
यद्यदिच्छसि चेदस्त्रं मत्तस्तत् तद् ददामि ते॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यह मेरा धनुष है, यह मेरा भाला है, यह मेरा चक्र है और यह मेरी गदा है। तुम मुझसे जो भी अस्त्र चाहते हो, मैं तुम्हें दे दूँगा॥18॥
 
“This is my bow, this is my spear, this is my discus and this is my mace. Whatever weapon you want from me, I will give it to you.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)