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mahabharat 10.12.12: एक दिन जब मैं द्वारका में समुद्रतट पर निवास कर रहा था, तब वह अकेले मेरे पास आया और हँसकर बोला -॥12॥   |   mahabharat अध्याय 10.12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  10.12.12 
स कदाचित् समुद्रान्ते वसन् द्वारवतीमनु।
एक एकं समागम्य मामुवाच हसन्निव॥ १२॥
 
 
अनुवाद
एक दिन जब मैं द्वारका में समुद्रतट पर निवास कर रहा था, तब वह अकेले मेरे पास आया और हँसकर बोला -॥12॥
 
‘One day, while I was staying on the seashore in Dwaraka, he came to me alone and smilingly said -॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)