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mahabharat 10.12.11: भरतनंदन! कुरुश्रेष्ठ! तदनन्तर, जब आप वन में रह रहे थे, उन्हीं दिनों अश्वत्थामा द्वारका में आकर रहने लगे। वहाँ वृष्णिवासियों ने उनका बड़े आदरपूर्वक स्वागत किया।   |   mahabharat अध्याय 10.12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  10.12.11 
ततस्तदा कुरुश्रेष्ठ वनस्थे त्वयि भारत।
अवसद् द्वारकामेत्य वृष्णिभि: परमार्चित:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
भरतनंदन! कुरुश्रेष्ठ! तदनन्तर, जब आप वन में रह रहे थे, उन्हीं दिनों अश्वत्थामा द्वारका में आकर रहने लगे। वहाँ वृष्णिवासियों ने उनका बड़े आदरपूर्वक स्वागत किया।
 
'Bharatanandan! Kurushrestha! Subsequently, during those days when you were living in the forest, Ashwatthama came to Dwarka and started living. There the people of Vrishni welcomed him with great respect.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)