श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 12: श्रीकृष्णका अश्वत्थामाकी चपलता एवं क्रूरताके प्रसंगमें सुदर्शनचक्र माँगनेकी बात सुनाते हुए उससे भीमसेनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेका आदेश देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  10.12.10 
स तदाज्ञाय दुष्टात्मा पितुर्वचनमप्रियम्।
निराश: सर्वकल्याणै: शोकात् पर्यचरन्महीम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
पिता के इन अप्रिय वचनों को सुनकर और समझकर दुष्टात्मा द्रोणपुत्र ने कल्याण की सारी आशा त्याग दी और महान दुःखी होकर पृथ्वी पर विचरण करने लगा॥10॥
 
'On hearing and understanding these unpleasant words of his father, the evil-spirited son of Drona gave up all hope of welfare and began wandering on the earth in great sorrow.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)