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mahabharat 10.11.8-9h: उसे गिरा हुआ देखकर वीर भीमसेन क्रोध में भरकर उछल पड़े और उसे दोनों भुजाओं से उठाकर अपनी गर्वित पत्नी को सांत्वना दी।   |   mahabharat अध्याय 10.11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  10.11.8-9h 
ततस्तां पतितां दृष्ट्वा संरम्भी सत्यविक्रम:।
बाहुभ्यां परिजग्राह समुत्पत्य वृकोदर:॥ ८॥
सा समाश्वासिता तेन भीमसेनेन भामिनी।
 
 
अनुवाद
उसे गिरा हुआ देखकर वीर भीमसेन क्रोध में भरकर उछल पड़े और उसे दोनों भुजाओं से उठाकर अपनी गर्वित पत्नी को सांत्वना दी।
 
Seeing her fallen, the valiant Bhimasena, filled with anger, jumped up and picked her up with both his arms and consoled her proud wife. 8 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)