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mahabharat 10.11.30-31h: हे मनुष्यों के राजा! नकुल के द्वारा चलाए जा रहे और वायु के समान वेग से चलने वाले वे वेगवान घोड़े बड़ी तेजी से चलने लगे।   |   mahabharat अध्याय 10.11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  10.11.30-31h 
ते हया: पुरुषव्याघ्र चोदिता वातरंहस:॥ ३०॥
वेगेन त्वरिता जग्मुर्हरय: शीघ्रगामिन:।
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के राजा! नकुल के द्वारा चलाए जा रहे और वायु के समान वेग से चलने वाले वे वेगवान घोड़े बड़ी तेजी से चलने लगे।
 
O King of men, those swift horses, driven by Nakul and moving as fast as the wind, started moving very hastily. 30 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)