Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.11.28-30h: वह द्रोणपुत्र को मारने का निश्चय करके अपने सुवर्णमय तथा विचित्र अंगों से सुसज्जित रथ पर सवार हुआ, हाथ में बाण और प्रत्यंचा सहित एक सुन्दर तथा विचित्र धनुष लेकर नकुल को सारथि बनाकर बाणों सहित धनुष तानकर तुरन्त ही घोड़ों को हांकने लगा। | mahabharat अध्याय 10.11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह द्रोणपुत्र को मारने का निश्चय करके अपने सुवर्णमय तथा विचित्र अंगों से सुसज्जित रथ पर सवार हुआ, हाथ में बाण और प्रत्यंचा सहित एक सुन्दर तथा विचित्र धनुष लेकर नकुल को सारथि बनाकर बाणों सहित धनुष तानकर तुरन्त ही घोड़ों को हांकने लगा।
Having resolved to kill Drona's son, he mounted his chariot adorned with gold and adorned with strange parts. He took in his hands a beautiful and strange bow with arrows and bowstring and made Nakula his charioteer and stretched out his bow with arrows and immediately made the horses drive.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥