Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 10.11.27-28h: द्रौपदी के शोक के कारण अनेक प्रकार के विलाप सुनकर, कुन्तीपुत्र पराक्रमी भीमसेन सहन नहीं कर सके।   |   mahabharat अध्याय 10.11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  10.11.27-28h 
तस्या बहुविधं दु:खान्निशम्य परिदेवितम्॥ २७॥
नामर्षयत कौन्तेयो भीमसेनो महाबल:।
 
 
अनुवाद
द्रौपदी के शोक के कारण अनेक प्रकार के विलाप सुनकर, कुन्तीपुत्र पराक्रमी भीमसेन सहन नहीं कर सके।
 
Hearing Draupadi's various lamentations due to grief, the mighty Bhimasena, son of Kunti, could not bear it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)