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mahabharat 10.11.26-27h: हे शत्रु के शत्रु पार्थ! जैसे तुमने पूर्वकाल में ये महान् कर्म किये थे, उसी प्रकार इस द्रोणपुत्र को भी मार डालो और सुखी रहो।'   |   mahabharat अध्याय 10.11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  10.11.26-27h 
यथैतान्यकृथा: पार्थ महाकर्माणि वै पुरा॥ २६॥
तथा द्रौणिममित्रघ्न विनिहत्य सुखी भव।
 
 
अनुवाद
हे शत्रु के शत्रु पार्थ! जैसे तुमने पूर्वकाल में ये महान् कर्म किये थे, उसी प्रकार इस द्रोणपुत्र को भी मार डालो और सुखी रहो।'
 
Parth, O enemy's enemy! Just as you performed these great deeds in the past, in the same way kill this son of Drona and be happy.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)