Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.11.25-26h: इसी प्रकार जब मैं हिडिम्बासुर से मिला, तब आप उसके रक्षक बने। जब विराटनगर में कीचक ने मुझे बहुत कष्ट दिया, तब आपने उस महान संकट से मेरी उसी प्रकार रक्षा की, जैसे इंद्र ने शची की रक्षा की थी।॥25 1/2॥ | mahabharat अध्याय 10.11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हिडिम्बदर्शने चैव तथा त्वमभवो गति:।
तथा विराटनगरे कीचकेन भृशार्दिताम्॥ २५॥
मामप्युद्धृतवान् कृच्छ्रात् पौलोमीं मघवानिव।
अनुवाद
इसी प्रकार जब मैं हिडिम्बासुर से मिला, तब आप उसके रक्षक बने। जब विराटनगर में कीचक ने मुझे बहुत कष्ट दिया, तब आपने उस महान संकट से मेरी उसी प्रकार रक्षा की, जैसे इंद्र ने शची की रक्षा की थी।॥25 1/2॥
‘Similarly, when I met Hidimbasur, you became his protector. When Keechak troubled me a lot in Viratnagar, you saved me from that great trouble in the same way as Indra saved Shachi.॥ 25 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥