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mahabharat 10.11.20-21h: द्रौपदी बोली, "महाराज! मैंने सुना है कि द्रोण के पुत्र के मस्तक पर एक मणि है जो उसके जन्म के साथ ही उत्पन्न हुई थी। यदि वह पापी युद्ध में मारा जाए और वह मणि मुझे वापस लाकर दी जाए, तो मैं उसे देखूँगी। राजन! मैंने दृढ़ निश्चय कर लिया है कि मैं तभी जीवित रह सकूँगी जब आप उस मणि को अपने मस्तक पर धारण करेंगे।"   |   mahabharat अध्याय 10.11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  10.11.20-21h 
द्रौपद्युवाच
द्रोणपुत्रस्य सहजो मणि: शिरसि मे श्रुत:।
निहत्य संख्ये तं पापं पश्येयं मणिमाहृतम्॥ २०॥
राजन् शिरसि ते कृत्वा जीवेयमिति मे मति:।
 
 
अनुवाद
द्रौपदी बोली, "महाराज! मैंने सुना है कि द्रोण के पुत्र के मस्तक पर एक मणि है जो उसके जन्म के साथ ही उत्पन्न हुई थी। यदि वह पापी युद्ध में मारा जाए और वह मणि मुझे वापस लाकर दी जाए, तो मैं उसे देखूँगी। राजन! मैंने दृढ़ निश्चय कर लिया है कि मैं तभी जीवित रह सकूँगी जब आप उस मणि को अपने मस्तक पर धारण करेंगे।"
 
Draupadi said, "Maharaj! I have heard that there is a gem on the head of Drona's son which was born with his birth. If that sinner is killed in the war and that gem is brought back to me, then I will see it. King! I have firmly decided that I will be able to live only after you wear that gem on your head."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)