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mahabharat 10.11.2: उस समय अपने पुत्रों, पौत्रों, भाइयों और सम्बन्धियों को याद करके महात्मा के हृदय में बड़ा दुःख हुआ॥2॥   |   mahabharat अध्याय 10.11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  10.11.2 
ततस्तस्य महान् शोक: प्रादुरासीन्महात्मन:।
स्मरत: पुत्रपौत्राणां भ्रातॄणां स्वजनस्य ह॥ २॥
 
 
अनुवाद
उस समय अपने पुत्रों, पौत्रों, भाइयों और सम्बन्धियों को याद करके महात्मा के हृदय में बड़ा दुःख हुआ॥2॥
 
At that time, remembering his sons, grandsons, brothers and relatives, the great soul felt great sorrow in his heart.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)