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mahabharat 10.11.17: अपनी प्रिय रानी और परम सुन्दरी द्रौपदी को उपवासपूर्वक बैठी देखकर धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर ने उससे कहा-॥17॥   |   mahabharat अध्याय 10.11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  10.11.17 
दृष्ट्वोपविष्टां राजर्षि: पाण्डवो महिषीं प्रियाम्।
प्रत्युवाच स धर्मात्मा द्रौपदीं चारुदर्शनाम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
अपनी प्रिय रानी और परम सुन्दरी द्रौपदी को उपवासपूर्वक बैठी देखकर धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर ने उससे कहा-॥17॥
 
Seeing his beloved queen and the most beautiful Draupadi sitting fasting, the virtuous king Yudhishthira said to her -॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)